सोमवार, 20 जून 2022

सूचना अधिकार को ताक पर रखते है वन बिभाग के आला अधिकारी

 जौनपुर, कहने के लिए उ0प्र0 के मुख्यमंत्री हो अथवा देश के प्रधान मंत्री मा0 नरेन्द्र मोदी जो अपने किसी भी प्रेसवार्ता मे कहते है कि सूचना का अधिकार भ्रष्टाचार को उजागर करने का एक अमोघ अस्त्र है हर भारतीय नागरीक को इसका प्रयोग करना चाहिए, अब पता नही यह बात माननीय लोगो द्वारा महज दिखावे के लिए कहा जाता है अथवा उनकी बातो का असर प्रदेश अथवा देश मे कार्यरत प्रशासनिक तंत्रो पर भी पड़ता है। प्राप्त सूचना के अनुसार जनपद जौनपुर के वन बिभाग मे रेंज सोइथाकला के वन क्षेत्राधिकारी महेन्द्र देव विक्रम है जो जनपद जौनपुर के श्रेष्ठ वन अधिकारियो मे एक है जिनके रेंज मे हुए काम की चर्चा पूरे रेंज के अंतर्गत आनेवाले ग्राम सभाओ की जनता करती है। प्राप्त जानकारी के अनुसार वन क्षेत्राधिकारी महेन्द्र देव विक्रम जी के पास कागजी कोरम पूरा करने का महारत हासिल है जिसके कारण वन विभाग के रेंज सोइथाकला से सम्बंधित कईबार सूचना के अधिकार अंतर्गत आवेदन दाखिल कर यह जानकारी प्राप्त करने की कोशिश कि गयी कि किस साल उनके रेंज की नर्सरी मे कितने पौधे पोषित किये गये तथा कितने पौधो को रोपित किया गया कितने पौघो का बृक्षा रोपण किया गया तथा उसमे लगने वाले मजदूर कौन कौन थे उनकी मजदूरी का भुगतान किस आधार पर कराया गया इस तरह के कई सवालो को लेकर सूचनाए मागी गयी परंतु वन क्षेत्राधिकारी महेन्द्र देव विक्रम ने मानो सूचना अधिकार कानून को अपने ठेंगे पर रख लिख है और आवेदन करने वालो को ठेगा दिखाते हुए कहते है कि हमारे कार्य का जबाब जब हमने जिला वन अधिकारी जौनपुर तथा कंजरवेटर वाराणसी को नही दिया तो तुम्हारी क्या औकात है जो हमारे किसी काम का हिसाब मागलो। बड़ी विकट सोचनीय बात है कि आखिर केन्द्र सरकार द्वारा पारित सूचना का अधिकार कानून जो कि भारतीय संसद मे पारित होकर लागू किया है ऐसे कानून की अवहेलना करने वाले चिन्दी चोर अधिकारियो पर प्रशासन अपना सिकंजा क्यो नही कसता? जिस पर गहन तरीके से देखने के बाद पता चला कि आवेदन का जबाब 30 दिन मे न देने पर आवेदनर्ता द्वारा जिला वन अधिकारी जौनपुर के समक्ष प्रथम अपील प्रस्तुत किया गया और नतिजा देख कर बड़ी ही हैरानी हुई कि वन विभाग का डी.एफ.ओ. भी शांत रहा जबकि उसकी अपनी जिम्मेदारी है कि वह स्वयं एक तिथि निर्धारित कर दोनो पक्षो को तलब कर वांछित सूचना उपलब्ध कराये, मगर नही जिला वन अधिकारी महोदय अपने मातहत कर्मचारी की कमियो को छुपाने के लिए मौनव्रत का पूरी तरह से पालन करने मे लगे है। इन कृत्यो से यह पता चलता है कि हर साल लाखो करोड़ो पेड़ लगने के बाद भी आज उ0प्र0 रेगिस्तान की शक्ल मे तब्दिल होता जा रहा है,अब तो पर्यावरण की सुरक्षा की सारी जिम्मेदारी भगवान भरोसे ही है।



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